आदेश - 3 आदेशिका साधारण नियम ( सिविल एवं दाण्डिक ) संसोधन 2020 | Order - 3 Order General Rules (Civil and Criminal) Amendment 2020

आदेश - 3 आदेशिका साधारण नियम ( सिविल एवं दाण्डिक ) संसोधन 2020 | Order - 3 Order General Rules (Civil and Criminal) Amendment 2020

Ashok Jangir LL.B.

 आदेश - 3   आदेशिका  साधारण नियम ( सिविल एवं दाण्डिक )  संसोधन 2020 

आदेश - 3

 आदेशिका 



1.आदेशिकाया आदेश की अन्तर्वस्तुएँ -

 (क) न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा जारी कियेगये प्रत्येक आदेशिका या किये गये आदेश में,इसे जारी करने वाले या करने वाले अधिकारी का नाम व शक्तियाँ, जिले के नाम व न्यायालय के नाम के साथ,स्पष्ट रूप से और सुपाठ्य रूप से वर्णित या मुद्रित किया जायेगा। आदेशिका या आदेश हस्ताक्षरित करने वाला प्रत्येक अधिकारी अपने नाम का सुपाठ्य रूप से और पूर्ण हस्ताक्षर करेगा। केवल लघु हस्ताक्षर करने या स्टाम्प लगाने की परिपाटी कठोरता से निषिद्धकी जाती है। 

(ख) प्रत्येक व्यक्ति, जिसके लिए आदेशिका जारी किया जाता है, को उसमें इस तरीके में वर्णित किया जायेगा जिससे कि उसे सही प्रकार से पहचाना जा सके। उसका पूरा और सही नाम, पता, पिता का नाम और ऐसा अन्य विवरण, जिससे कि उसकी पहचान की जा सके, उल्लिखित किया जाना चाहिए। आदेशिका को तामिल करवाने व निष्पादन के मामले में, जिसे बड़े कस्बों और शहरों में कार्यान्वित करना हो, गली का नाम, नगरपालिका का वार्ड नं. और मकान संख्या, यदि मालूम हों, दिया जाना चाहिए।

दृष्टांत 
न्यायालय का नाम 
                                                                  स्थान / जिला / पिन कोड

 पिठासीन अधिकारी का नाम : 

पिठासीन अधिकारी का पदनाम :

आदेशिका जारी होने वाले व्यक्ति का नाम : 

पिता / माता / पति का नाम : 

फोन / ईमेल आईडी, यदि हो : 

आयु :

 जाति : 

पता : 

मकान संख्या : 

वार्ड संख्या : 

गली / मोहल्ला : 

गांव / कस्बा / शहर : 

डाक घर :

 पिन कोड : 

जिला : राज्य : 

संपूर्ण हस्ताक्षर एवं दिनांक पिठासीन अधिकारी का पदनाम, और के आदेश द्वारा संपूर्ण हस्ताक्षर एवं दिनांक प्राधिकारी हस्ताक्षरकर्ता का पद

 जहाँ अभिलेख में अथवा आदेशिका जारी करने के लिए न्यायालय को प्रस्ताव करने वाले व्यक्ति के आवेदन में यदि इस प्रकार का विवरण नहीं हो तो जारी करने वाला अधिकारी न्यायालय से तुरन्त आदेश प्राप्त करेगा।


2. विदेशी देशों में आदेशिका जारी किया जाना - विधिक आदेशिका उच्च न्यायालय और भारत सरकार के विदेशी मामलों के मंत्रालय गृह मामलों के मंत्रालय के जरिये के अलावा विदेशी या राष्ट्रमंडलीय देश में निष्पादन के लिए नहीं भेजा जायेगी। ऐसी आदेशिका भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी गाइडलाइंस (परिशिष्ठ अ) के अनुसार भेजी जायेगी।

 3. विदेशी न्यायालयों में भेजी जाने वाली आदेशिकाओं के लिए निदेश-जब कभी आदेशिकाओं को विदेश राज्यों में (अर्थात् भारत के बाहर के देश) तामील के लिए आदेशिकाएँ जारी की जाती हैं तो, निम्नलिखित निदेशों का सावधानीपूर्वक पालन किया जाएगा : (क) उन्हें उचित प्रपत्रों में तैयार किया जाएगा तथा अंकित किया जाएगा, जहाँ मुद्रित प्रपत्रों का उपयोग नहीं होता है, उन्हें टिकाऊ कागज पर लिखा जाएगा। (ख) इस प्रकार के समन इत्यादि पर मुन्सरिम के नहीं, अपितु जारी करने वाले पीठासीन अधिकरी के हस्ताक्षर होंगे तथा वह स्वयं सन्तुष्ट होगा कि दस्तावेजों पर सही पता लिखा गया है तथा उचित रीति से मुहरबन्द किया गया है। यह विषय पक्षकार और मुन्सरिम पर नहीं छोड़ा जाएगा। (ग) आदेशिकाओं के साथ भेजे जाने वाले अग्रेषण-पत्र में उन व्यक्तियों के नाम और पते भी लिखे जाएंगे जिन पर आदेशिकाओं की तामील की जानी है। (घ) सभी दस्तावेजों के साथ, जो अंग्रेजी में नहीं है, उनका अंग्रेजी अनुवाद भेजा जाएगा तथा जिस पर आदेशिका की तामील वांछित है, वह व्यक्ति यदि ब्रिटेन का नहीं है, तो संबंधित देश की भाषा में किया गया अनुवाद साथ भेजा जाएगा। (ङ) ऐसे मामलों में, न्यायालय, कम से कम सात महीने पश्चात् की तिथि वाद की सुनवाई के लिए निश्चित करेगा जिससे आदेशिका के निष्पादन के लिए तथा वाद की सुनवाई के लिए परवर्ती तिथि से पूर्व उसे भारत में लौटाने के लिए पर्याप्त समय दिया जा सके। आदेशिका में विनिर्दिष्टप्रत्यावर्तनीय तिथि, किसी भी स्थिति में, अन्तिम रूप से उच्च न्यायालय को प्रेषित की जाने की तिथि से, 6 मास से कम की नहीं होनी चाहिए।